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नवरात्रि में भूल कर भी न करें ये 5 गलतियाँ | Navratri 2025 Tips

नवरात्रि में भूल कर भी न करें ये 5 गलतियाँ | Navratri 2025 Tips

नवरात्रि में भूल कर भी न करें ये 5 गलतियाँ | Navratri 2025 Tips

नवरात्रि महापर्व हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है। साल भर में दो बार आने वाली नवरात्रि महापर्व – चैत्र और शारदीय नवरात्रि – दोनों ही शक्ति की आराधना का प्रतीक हैं। इन नौ दिनों में भक्त देवी दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा करके न केवल आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, बल्कि आत्मिक शांति और शक्ति भी अर्जित करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि नवरात्रि में छोटी-सी भी लापरवाही साधना में बाधा डाल सकती है और माँ देवी की कृपा से वंचित कर सकती है।

नवरात्रि में भूल कर भी न करें ये 5 गलतियाँ

नवरात्रि में भूल कर भी न करें ये 5 गलतियाँ का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

हम आपको बताने वाले है की नवरात्रि में की जाने वाली पाँच ऐसी गलतियाँ, जिनसे हर हाल में बचना चाहिए। ये बातें परंपरा और आस्था दोनों से जुड़ी हुई हैं। अगर आप इन नियमों का पालन करते हैं, तो आपका व्रत और पूजा-उपासना और भी अधिक फलदायी होगी।

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1. लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन न करें

नवरात्रि व्रत का पहला सबसे महत्वपूर्ण नियम है – सात्विकता का पालन करना। माँ दुर्गा को सात्विक भोजन अर्पित करना चाहिए और स्वयं भी सात्विक रहना चाहिए यही माँ देवी के प्रति सच्ची भक्ति मानी जाती है।

लहसुन और प्याज को तामसिक माना जाता हैं, यानी ये आलस्य और वासनाओं को बढ़ाते हैं। इसी तरह मांस और मदिरा का सेवन न केवल पाप माना गया है, बल्कि यह शरीर और मन दोनों को अशुद्ध कर देता है।

हिन्दू धर्म में ऐसा माना जाता है की व्रत के दिनों में इन तामसिक चीज़ों का सेवन किया जाए, तो माता रानी नाराज़ हो सकती हैं।
इसलिए:

  • फलाहार और सात्विक भोजन करें।
  • अनाज की जगह कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना और फल का सेवन करें।
  • शुद्ध और पवित्र भोजन बनाकर ही ग्रहण करें।

सात्विक भोजन से मन को शांती मिलती है और भक्ति में एकाग्रता आती है।

2. नवरात्रि में नौ दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करें

नवरात्रि के दिनों में केवल भोजन संबंधी नियम ही नहीं, बल्कि आचरण संबंधी नियम भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। स्त्री और पुरुष – दोनों को ही नौ दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

ब्रह्मचर्य का पालन करने का अर्थ है – मन, वचन और कर्म से पवित्र बने रहना। यह समय केवल भोग-विलास का नहीं, बल्कि साधना, संयम और आत्मिक उन्नति का है। अगर हम व्रत रखते हुए भी मन और व्यवहार से शुद्ध नहीं हैं, तो व्रत का वास्तविक फल हमें प्राप्त नहीं होता।

आध्यात्मिक दृष्टि से: ब्रह्मचर्य से मन की शक्ति बढ़ती है और साधक की एकाग्रता बनी रहती है।

स्वास्थ्य की दृष्टि से: इन नौ दिनों का संयम शरीर को भी हल्का और ऊर्जावान बनाता है।

इसलिए कोशिश करें कि नवरात्रि के दौरान केवल माता के ध्यान और सेवा में मन लगाएं।

3. नवरात्रि में घर को खाली न छोड़ें

नवरात्रि का पर्व घर-घर में शक्ति के स्वागत का प्रतीक है। इन दिनों ज्यादातर लोग घर में अखंड ज्योति जलाते हैं और घटस्थापना करते हैं। माना जाता है कि जहाँ अखंड ज्योति जल रही हो, उस घर को खाली नहीं छोड़ना चाहिए।

अगर आप किसी कारणवश बाहर जाते हैं, तो किसी विश्वसनीय व्यक्ति को घर पर जरूर रखें।
यह न केवल धार्मिक कारणों से ज़रूरी है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी।

आस्था कहती है कि माता का स्वरूप दीपक की ज्योति और कलश में स्थापित होता है। अगर घर खाली छोड़ दिया जाए और दीपक बुझ जाए तो यह अशुभ माना जाता है। इसलिए घर की पवित्रता और पूजा-व्रत की निरंतरता बनाए रखने के लिए घर खाली न छोड़ना बेहद आवश्यक है।

4. नवरात्रि के दौरान नींबू काटना वर्जित है

नवरात्रि में नींबू काटने या उसका सेवन करने से मना किया जाता है। मान्यता है कि इन दिनों नींबू काटने से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है और पूजा में विघ्न आ सकता है।

नींबू को ऊर्जा शुद्ध करने वाला फल माना जाता है। लेकिन व्रत और साधना के दौरान नींबू काटना वर्जित माना गया है।

  • धार्मिक दृष्टिकोण से: नींबू काटना अशुभ माना जाता है।
  • पारंपरिक दृष्टिकोण से: नींबू का रस शरीर में अम्लता (Acidity) बढ़ा सकता है, जिससे व्रत के दौरान असुविधा होती है।

इसलिए कोशिश करें कि नवरात्रि के दिनों में नींबू और उससे बनी चीज़ों का सेवन न करें। इसकी जगह आप नारियल पानी, फलों का रस और दूध का सेवन कर सकते हैं।

5. काले कपड़े न पहनें और बाल-नाखून न कटवाएँ

नवरात्रि में कपड़ों का भी विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इन दिनों काले कपड़े पहनना अशुभ होता है।
काला रंग नकारात्मकता और शोक का प्रतीक माना जाता है। इसके विपरीत, नवरात्रि में लाल, पीला, गुलाबी, हरा, नीला और नारंगी जैसे उज्ज्वल रंग शुभ और मंगलकारी माने जाते हैं।

इसी तरह, इन नौ दिनों में बाल और नाखून काटने से भी मना किया गया है। यह व्रत और साधना के नियमों के खिलाफ माना जाता है।

  • धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि में शरीर को जितना संभव हो, स्वाभाविक रूप में रखना चाहिए।
  • यह भी कहा जाता है कि बाल-नाखून काटना आलस्य और लापरवाही का प्रतीक है, जो भक्ति में बाधा डालता है।

इसलिए इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर ही नवरात्रि का व्रत पूर्ण फलदायी बनता है।

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