
“द कॉन्ज्यूरिंग: लास्ट राइट्स” भारतीय सिनेमाघरों में 5 सितंबर, 2025 को रिलीज़ हो चूका है,यह हॉरर फ्रैंचाइज़ी का अंतिम अध्याय है, यह हॉरर फ्रेंचाइज़ का अंतिम अध्याय है, जिसमें पैट्रिक विल्सन और वेरा फार्मिगा अपनी एड और लोरेन वॉरेन की भूमिकाओं को दोहरा रहे हैं।
तीन भारतीय फिल्में – “बागी 4”, “द बंगाल फाइल्स” और “मधराज़ी” – तीनो फिल्म एक ही दिन रिलीज हुईं, लेकिन “लास्ट राइट्स” ने सबसे ज्यादा लोगो को प्रभावित किया |
पहले दिन की कमाई: कितनी?
रिकॉर्ड तोड़ ₹18 करोड़ की कमाई
“द कॉन्ज्यूरिंग: लास्ट राइट्स” को भारतीय लोगो ने बहोत प्यार दिया रिलीज़ के पहले दिन ही इस हॉरर फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है और इसकी कुल कमाई ₹18 करोड़ रही है – जो भारतीय फिल्मों के साथ भी मुकाबला कर रही बड़ी फिल्मों से बहुत ऊपर है |
इसके अनुसार, इसने हॉरर शैली में अब तक की सबसे ज़्यादा ओपनिंग दर्ज की है।
प्री-सेल और टिकट बिक्री
“द कॉन्ज्यूरिंग: लास्ट राइट्स” रिलीज़ के पहले दिन ही भारत मैं 2.27 लाख टिकट बुक हो चुके थे, जो 2025 में किसी हॉलीवुड मूवी जिसने रिलीज़ के पहले दिन सबसे तेज बिक्री की, यह “छावा” जैसी भारतीय लोकप्रिय फिल्म से भी आगे रही, जिसने 2.23 लाख टिकट बुक किए थे।
क्या यही भारत में अब तक की सबसे बड़ी हॉरर ओपनिंग है?
हां, यह हॉरर फिल्मो में भारत में अब तक की सबसे बड़ी ओपनिंग रही है।
पिछला रिकॉर्ड “द नन” (2018) ने बनाया था, जिसने ₹10.8 करोड़ की शुरुआत कमाई की थी — यानी “लास्ट राइट्स” ने इसे भारी अंतर से तोड़ दिया
प्रतिक्रिया और बॉक्स ऑफिस
फिल्म की समीक्षा मिली-जुली रही। कुछ समीक्षक इसे थका देने वाला और क्लिशेपूर्ण मानते हुए आलोचना की—उनका कहना है कि फ्रैंचाइज़ी अब अपने चरम पर पहुँच चुकी है और नया डर नहीं दे पा रही।
हालांकि, बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन की कमाई काफ़ी अच्छी रही। दर्शकों का उत्साह बना रहा है, खासकर हॉरर प्रेमियों के बीच। समीक्षा लेखों में फिल्म के इस प्रदर्शन को उल्लेखनीय बताया गया है।
संभावित आगे की राह
इस शुरुआत को देखकर इसके आधार पर उम्मीद की जा रही है कि ये फिल्म ₹100 करोड़ नेट कलेक्शन तक पहुँच सकती है — जो हॉरर फिल्मों के लिए भारत में एक अच्छा मुकाम होगा | एक विश्लेषक ने अनुमान लगाया था कि यह ₹15 करोड़ के आस-पास ओपनिंग करेगा, लेकिन हकीकत में यह ₹18 करोड़ के आसपास रहा |
यथार्थ से प्रेरणा – स्मर्ल केस
इस फिल्म का कथानक वास्तविक जीवन में पेंसिलवेनिया के वेस्ट पिट्स्टन में स्मर्ल परिवार के घर में हुई एक कथित पोक्सर घटनाओं से प्रेरित है। 1970 के दशक में इस परिवार ने अजीबोगरीब घटनाओं की रिपोर्ट कीया—उन्हें बिलकुल स्पष्ट रूप से महसूस हुआ कि उनके घर में कोई अलौकिक शक्ति मौजूद है। एड और लॉरेन ने 1986 में इस मामले की जांच की और आश्चर्यजनक रूप से पाया कि मामला चिंताजनक और गहराई से गूढ़ है।
कहानी का ढांचा और चरित्र
“द कॉन्ज्यूरिंग: लास्ट राइट्स” फिल्म की शुरुआत 1964 की एक फ्लैशबैक से होती है, जहाँ एड और लॉरेन एक पुराने दर्पण की जांच कर रहे होते हैं। यह घटना अभी जन्म नहीं ले चुकी जूडी वॉरेन—उनकी बेटी—की जिंदगी की नींव में भय का बीज बो देती है।
फिल्म का मुख्य भाग 1986 में सेट है, जब स्मर्ल परिवार अजीब घटनाओं—तेज़ ध्वनियों, छायाओं, गिरते सीलिंग लैम्प और रक्त चमचमता दर्पण—से जूझ रहा होता है। इस दर्पण के माध्यम से एक राक्षसी शक्ति परिवार को त्रस्त कर रही है। जूडी, अब टोनी स्पेरा के साथ गर्भ-वधू (सगाई की स्थिति में), स्थिति को गंभीर समझते हुए वॉरेन्स की सहायता मांगती है। अंततः तीनों मिलकर एक धार्मिक एवं भावनात्मक संघर्ष में शामिल हो जाते हैं, और शक्ति को रोक कर दर्पण को तोड़ देते हैं।
निष्कर्ष
“द कॉन्ज्यूरिंग: लास्ट राइट्स” एक आख़िरी विदाई की तरह दिखती है—एक ऐसा समापन जहाँ डरावनी शक्ति, वास्तविकता की गहराई और पारिवारिक भावनाएँ एक साथ मिलती हैं। यह फ़िल्म स्मरल मामले की पौराणिक कथाओं को धार्मिक और भावनात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है, और वॉरेन परिवार की कहानी को एक भावपूर्ण अंत देती है।। जो दर्शक दशक भर इस फ्रैंचाइज़ी से जुड़े रहे, वे इस ताजगी भरे साहसिक यात्रा के अंत को देखकर संतुष्ट महसूस कर सकते हैं।







